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August 20, 2022
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आज देहरादून में करीब 18 हजार करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

समाचार डेस्क दिल्ली (ज़मीर आज़ाद)

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज उत्‍तराखंड में देहरादून जाएंगे। वे दिन में एक बजे करीब 18 हजार करोड रूपये की लागत वाली कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्‍यास करेंगे। वे देहरादून में एक रैली को भी संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री की यात्रा का उद्देश्‍य सडकों के ढांचागत सुधार संबंधी परियोजनाओं को लागू करना है। इससे यात्रा सुगम और सुरक्षित होगी तथा इस क्षेत्र में पर्यटन में भी वृद्धि होगी। यह दूरदराज के क्षेत्रों को आपस में जोडने की परिकल्‍पना के अनुरूप है।

मोदी 11 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनमें दिल्‍ली देहरादून आर्थिक गलियारा भी शामिल है। इसका निर्माण लगभग आठ हजार तीन सौ करोड रूपये होगा। इससे दिल्‍ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय में काफी कमी होगी और यह दूरी छह घंटे की बजाय ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। इस मार्ग में हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ और बडौत को जोडने के लिए सात प्रमुख इंटरचेंज होंगे। इसमें एशिया का सबसे बडा 12 किलोमीटर का वन्‍यजीव एलिवेटिड गलियारा भी होगा, जहां पशुओं का निर्बाध आवागमन हो पायेगा। देहरादून में दात काली मंदिर के पास 340 मीटर लम्‍बी सुरंग बनने से वन्‍यजीव पर इसका असर कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा वाहनों से  पशुओं की टक्‍कर रोकने के लिए गणेशपुर देहरादून खंड पर पशुओं के आवागमन के लिए कई मार्ग बनाये जाएंगे। दिल्‍ली देहरादून आर्थिक गलियारे में प्रत्‍येक पांच सौ मीटर पर वर्षा के जल संरक्षण की भी व्‍यवस्‍था होगी और चार सौ से अधिक वाटर रिचार्ज प्‍वांइट बनाये जायेंगे।

दिल्‍ली देहरादून आर्थिक गलियारे से दो हजार करोड रूपये की लागत से हरित क्षेत्र परियोजना का निर्माण किया जाएगा और इससे हलगोवा, सहारनपुर से हरिद्वार में भद्राबाद जोडे जाएंगे। इससे दिल्‍ली और हरिद्वार के बीच यात्रा समय में काफी कमी आयेगी। मनोहरपुर से कांगडी के बीच हरिद्वार रिंगरोड परियोजना बनने से हरिद्वार के निवासियों को जाम से राहत मिलेगी। इस पर 16 सौ करोड रूपये से अधिक की लागत आयेगी।

देहरादून और हिमाचल प्रदेश में पोंटा साहेब सडक परियोजना से दोनों स्‍थानों के बीच यात्रा समय में कमी आयेगी और करीब 17 सौ करोड रूपये की लागत से इसका निर्माण किया जाएगा। इससे अंतर्राज्‍यीय पयर्टन में भी तेजी आयेगी। नजीबाबाद कोटद्वार सडक चौडीकरण परियोजना से यात्रा समय में कमी होगी और इससे लैंसडाउन जुड जायेगा।

गंगा नदी पर लक्ष्मण झूला के नजदीक एक पुल का निर्माण भी किया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला का निर्माण वर्ष 1929 में किया गया था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। नए  पुल में लोगों के आवागमन के लिए कांच का फर्श होगा और इस पर हल्के वजन की गाड़ियों को आने जाने की अनुमति होगी।

प्रधानमंत्री देहरादून में बाल अनुकूल शहर की भी आधारशिला रखेंगे। इसके तहत बच्‍चों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाया जाएगा। मोदी सात सौ करोड़ रुपए से अधिक की जलापूर्ति, सड़क और जल निकासी से संबंधित परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
आध्यात्मिक स्मार्ट शहरों के विकास और पर्यटन से जुड़े ढांचागत निर्माण में सुधार करने की प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप  बद्रीनाथ धाम और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में बुनियादी विकास कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी। हरिद्वार में पांच सौ करोड़ रूपसे से अधिक की लागत से नए मैडिकल कॉलेज का भी निर्माण किया जाएगा।

मोदी क्षेत्र में भूस्खलन की गंभीर समस्या से निपटने और सुरक्षित यात्रा बनाने पर केंद्रित सात परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे। इनमें बद्रीनाथ धाम के मार्ग में पड़ने वाली लामबगड़ परियोजना, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-58 पर सकनीधर, श्रीनगर और देवप्रयाग परियोजनाएं शामिल हैं। लामबगड़ परियोजना सर्वाधिक खतरे वाले भूस्खलन क्षेत्र में है। इस परियोजना का रणनीतिक महत्व भी है।
चारधाम सड़क संपर्क परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-58 पर देवप्रयाग से श्रीकोट और ब्रह्मपुरी से कोडियाला तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना का भी उद्घाटन किया जायेगा।
देहरादून में हिमालयी सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन के अलावा यमुना नदी पर बनी 120 मेगावाट की व्यासी जलविद्युत परियोजना का भी शुभारंभ किया जाएगा। इस परियोजना पर 1700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। हिमालयी सांस्कृतिक केंद्र में राज्य स्तर का एक संग्रहालय, 800 दर्शकों के बैठने की क्षमता वाला सभागार, पुस्तकालय, सम्मेलन हॉल  होंगे।

प्रधानमंत्री देहरादून में अत्‍याधुनिक सुगंधि प्रयोगशाला केन्‍द्र का भी उदघाटन करेंगे। इस प्रयोगशाला में इत्र, साबुन, सैनिटाइजर, एयर फ्रेशनर, अगरबत्ती सहित विभिन्न उत्पादों के निर्माण के लिए शोध किया जाएगा। इससे क्षेत्र में संबंधित उद्योगों की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह केंद्र सुगंधित पौधों की अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्मों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

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