31 जनवरी को होने वाली ऐतिहासिक ‘भारत-अरब बैठक’ में व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर होगा बड़ा फैसला
नई दिल्ली:
भारत और अरब देशों के बीच रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूडान के विदेश मंत्री मोहिलदीन सलीम अहमद इब्राहिम एक अहम दौरे पर नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। वे यहां 31 जनवरी को होने वाली ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक’ में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। खास बात यह है कि भारत पहली बार इस बड़े कूटनीतिक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
साझा विजन: व्यापार और तरक्की पर जोर इस हाई-प्रोफाइल बैठक की कमान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संयुक्त रूप से संभालेंगे। सम्मेलन में कई अरब देशों के दिग्गज नेता जुट रहे हैं। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा सिर्फ सरकारी बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से चार विषय रहेंगे:
- व्यापार: दोनों क्षेत्रों के बीच बिजनेस को आसान बनाना।
- स्वास्थ्य: चिकित्सा सुविधाओं और दवाओं के आदान-प्रदान में सहयोग।
- शिक्षा: छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना।
भारत और सूडान: पुरानी दोस्ती को मिली नई धार भारत और सूडान के रिश्ते दशकों पुराने और भरोसेमंद रहे हैं। इससे पहले दिसंबर में सूडान की राजधानी जुबा में दोनों देशों के बीच काफी सकारात्मक बातचीत हुई थी, जिसमें ट्रेनिंग और मेडिकल सहायता पर सहमति बनी थी। दिल्ली में हो रही यह बैठक उसी बातचीत को जमीन पर उतारने का काम करेगी।
विदेश मंत्रालय ने सूडानी मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया है। मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि इस यात्रा से न केवल भारत-सूडान के संबंध गहरे होंगे, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। सालों बाद हो रही इस बैठक से पूरी दुनिया को शांति और साझा तरक्की का संदेश जाने की उम्मीद है।











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