उत्तर प्रदेश के ‘पटना पक्षी अभयारण्य’ और गुजरात के ‘छारी-ढांड’ को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली:
दुनिया भर में मनाए जाने वाले ‘विश्व वेटलैंड्स दिवस’ (2 फरवरी) से ठीक पहले भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। सरकार ने देश के दो और महत्वपूर्ण जल क्षेत्रों (वेटलैंड्स) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए उन्हें रामसर साइट्स की सूची में शामिल कर लिया है। ये दो नई जगहें हैं—उत्तर प्रदेश के एटा जिले का पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ का छारी-ढांड संरक्षण रिजर्व।
इन दो नए नामों के जुड़ने के साथ ही अब भारत में रामसर साइट्स की कुल संख्या बढ़कर 98 हो गई है, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है।
क्यों खास हैं ये दो नई जगहें?
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये दोनों इलाके जैव विविधता के लिहाज से अनमोल हैं।
- पटना पक्षी अभयारण्य (यूपी): नाम भले ही पटना हो, लेकिन यह उत्तर प्रदेश के एटा में स्थित है। यह इलाका प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा बसेरा है। सर्दियों में यहाँ हजारों मील दूर से आए पक्षी अपना डेरा डालते हैं।
- छारी-ढांड (गुजरात): कच्छ के रण में स्थित यह क्षेत्र अपनी खूबसूरती और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जाना जाता है। मानसून में यहाँ पानी भरने पर फ्लेमिंगो (राजहंस) और अन्य दुर्लभ पक्षियों का मेला लग जाता है। यहाँ सिर्फ पक्षी ही नहीं, बल्कि चिंकारा, भेड़िया और रेगिस्तानी बिल्लियां भी सुरक्षित रहती हैं।
पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खबर पर खुशी जताते हुए कहा कि यह प्रकृति संरक्षण के प्रति भारत की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को बधाई देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने से यहाँ के वन्यजीवों को और बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
क्यों जरूरी हैं वेटलैंड्स?
वेटलैंड्स यानी ‘नम भूमि’ को धरती का गुर्दा (किडनी) कहा जाता है। ये न केवल बाढ़ को रोकने और पानी को साफ करने में मदद करते हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में तापमान को नियंत्रित रखने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। पिछले एक दशक में भारत ने अपने वेटलैंड्स को बचाने की दिशा में तेजी से काम किया है।











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