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बडगाम का हुनर: ‘नक्श-ए-मीरास’ ने दी पुरानी कला को नई उड़ान

बडगाम का हुनर: 'नक्श-ए-मीरास' ने दी पुरानी कला को नई उड़ान
बडगाम का हुनर: 'नक्श-ए-मीरास' ने दी पुरानी कला को नई उड़ान

कारीगरों और विशेषज्ञों ने साथ मिलकर बुने उम्मीद के धागे, विरासत को सहेजने का लिया संकल्प।

बडगाम के ओमपोरा स्थित NIFT कैंपस में चल रही तीन दिवसीय ‘नक्श-ए-मीरास’ वर्कशॉप अब थम गई है, लेकिन अपने पीछे नई उम्मीदें छोड़ गई है। यह आयोजन सिर्फ एक वर्कशॉप नहीं था, बल्कि बडगाम की समृद्ध विरासत और बेमिसाल कारीगरी का जश्न था। यहाँ स्थानीय कारीगरों और विशेषज्ञों ने एक ही मंच साझा किया और इस बात पर गहरा मंथन किया कि कैसे जिले की इस अनमोल हस्तशिल्प (Handicraft) क्षमता को दुनिया के सामने लाया जाए।

यह पूरा कार्यक्रम विचारों के आदान-प्रदान और कुछ नया सीखने का एक बेहतरीन मौका साबित हुआ। क्राफ्ट की दुनिया के दिग्गजों और ज़मीनी कारीगरों ने न सिर्फ अपना हुनर दिखाया, बल्कि काम करने के नए तौर-तरीके भी सीखे। चर्चा का मुख्य केंद्र यही था कि पुरानी परंपराओं को कैसे जिंदा रखा जाए।

माहौल तब और खुशनुमा हो गया जब एक स्थानीय कारीगर ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “ऐसे कार्यक्रमों में आकर हमें अपनी जड़ों पर गर्व महसूस होता है। जब आज की युवा पीढ़ी हमारी पुरानी कला में दिलचस्पी दिखाती है, तो दिल को बहुत सुकून मिलता है।”

विशेषज्ञों ने भी सलाह दी कि अगर हमें इन नायाब कौशलों को बचाना है, तो इन्हें सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखना होगा। इसे स्कूलों और सामुदायिक समूहों के जरिए अगली पीढ़ी तक पहुँचाना होगा। यह पहल हमें याद दिलाती है कि अपनी मिट्टी की खुशबू और अपनी खास पहचान को संभाल कर रखना कितना जरूरी है।