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अभी-अभी देश

बर्फबारी और खतरों से निपटने के लिए हुआ ‘महा-अभ्यास

इस अभ्यास में स्थानीय पुलिस, आपदा प्रबंधन की टीमें और मौसम विभाग के जानकारों ने हिस्सा लिया। अभ्यास को बिल्कुल असली जैसा बनाने के लिए ऐसी स्थिति रची गई, मानो कुछ पर्यटक बर्फ के नीचे दब गए हों या रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हों।
इस अभ्यास में स्थानीय पुलिस, आपदा प्रबंधन की टीमें और मौसम विभाग के जानकारों ने हिस्सा लिया। अभ्यास को बिल्कुल असली जैसा बनाने के लिए ऐसी स्थिति रची गई, मानो कुछ पर्यटक बर्फ के नीचे दब गए हों या रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हों।

हिमस्खलन जैसी आपदाओं में जान बचाने के लिए प्रशासन ने परखी अपनी तैयारी

कश्मीर की वादियों में बसा गुलमर्ग जितना खूबसूरत है, सर्दियों में वहां चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी होती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हाल ही में वहां प्रशासन के अलग-अलग विभागों ने मिलकर एक बड़ा ‘मॉक ड्रिल’ (बचाव अभ्यास) किया। इसका सीधा मकसद यह देखना था कि अगर कभी हिमस्खलन (एवलांच) हो जाए या भारी बर्फबारी से कोई मुसीबत आ खड़ी हो, तो हमारा सिस्टम कितनी तेजी से लोगों की जान बचा सकता है।

तालमेल और तेजी का इम्तिहान :

मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि गुलमर्ग में एडवेंचर के शौकीन लोग भारी तादाद में आते हैं, लेकिन कुदरत के कड़े तेवर कभी भी भारी पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “आज का यह अभ्यास हमारे लिए बहुत जरूरी था। इससे हमें यह सीखने को मिला कि मुसीबत के वक्त पुलिस, मेडिकल और रेस्क्यू टीमें आपस में बिना कन्फ्यूजन के कैसे काम कर सकती हैं।”

सीख और भविष्य की तैयारी :

ड्रिल खत्म होने के बाद सभी अधिकारियों ने एक बैठक की। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि रेस्क्यू के दौरान कौन सी चीजें बहुत अच्छी रहीं और किन चीजों में अभी और सुधार की गुंजाइश है। खास जोर इस बात पर था कि घायल को कितनी जल्दी प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) दी जा सके।

प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है।यह तैयारी वहां घूमने आने वाले सैलानियों और स्थानीय निवासियों को भरोसा दिलाती है कि पहाड़ों के रोमांच के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम हैं।