धनबाद: भीषण गर्मी के इस दौर में जहां गला तर करने के लिए पानी की एक-एक बूंद कीमती है, वहीं धनबाद के महुदा (बाघमारा) अंतर्गत पाण्डेडीह गांव की तस्वीर सरकारी दावों की कलई खोल रही है। यहां लाखों रुपए की लागत वाली ‘महुदा ग्रामीण जलापूर्ति योजना’ भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। विडंबना यह है कि इस योजना का दोबारा उद्घाटन होने के बावजूद ग्रामीणों के नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी।
क्या है पूरा मामला?
3 मई को महुदा में बड़े जश्न के साथ बाघमारा विधायक शत्रुधन महतो ने नारियल फोड़कर जलापूर्ति योजना का पुन: शुभारंभ किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनकी प्यास बुझेगी, लेकिन उद्घाटन का शोर थमते ही सच्चाई सामने आ गई। उद्घाटन के बाद आज तक एक भी दिन घरों में पानी नहीं पहुँचा।
इतिहास और विफलता का कारण
इस योजना का शिलान्यास करीब पांच साल पहले तत्कालीन विधायक ढुलू महतो ने किया था। तब से यह योजना कभी सुचारू नहीं हो पाई। कभी रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान पाइपलाइन काट दी गई, तो कभी रखरखाव के अभाव में यह बंद रही। पिछले डेढ़ साल से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त थी, जिसे हाल ही में ठीक करने का दावा कर दोबारा उद्घाटन किया गया, मगर हकीकत जस की तस है।
बीमारी का खतरा और बदहाली
स्थानीय ग्रामीण भरत कुमार रजक ने बताया कि उद्घाटन की हड़बड़ी में विभाग ने सड़क किनारे की नाली को ही मिट्टी से ढंक दिया। अब नाली का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। पास ही आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालय है, जहां मासूम बच्चे इसी गंदगी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि उनके लिए ये उद्घाटन पत्थर मात्र एक ‘चुनावी स्टंट’ बनकर रह गए हैं। सवाल यह उठता है कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी जनता प्यासी क्यों है और इस विफलता के लिए जवाबदेह कौन है?











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