कड़ाके की ठंड में पहली बार बर्फ हटाने का मिशन शुरू :
सर्दियों का मौसम और कश्मीर की वादियां – सुनने में जितना खूबसूरत लगता है, वहां रहने वालों के लिए चुनौतियां उतनी ही बड़ी होती हैं। एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने वह कर दिखाया है जो पहले शायद ही कभी सोचा गया हो।
बर्फ की दीवारें और जवानों का हौसला : BRO का ‘प्रोजेक्ट संपर्क’ इस वक्त पीर की गली (Pir Ki Gali) जैसे ऊंचे और दुर्गम इलाकों में कुदरत से लोहा ले रहा है। यहाँ तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे है और सड़क पर 8 से 10 फीट तक बर्फ जमा है।
यह सड़क आखिर इतनी ज़रूरी क्यों है? : मुगल रोड को श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे का सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। जब मुख्य हाईवे लैंडस्लाइड या बर्फबारी से बंद हो जाता है, तो कश्मीर घाटी का संपर्क बाकी देश से कटने लगता है।
इस बार सर्दी में सड़क खुलने से कई बड़े फायदे होंगे:
- कनेक्टिविटी: राजौरी और पुंछ के लोग अब अलग-थलग महसूस नहीं करेंगे।
- इलाज और व्यापार: मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुँचाना और ज़रूरी सामान की सप्लाई जारी रखना आसान होगा।
- भविष्य की राह: अगर यह कोशिश कामयाब रही, तो आने वाले सालों में कश्मीर को 12 महीने जोड़े रखने का सपना सच हो सकता है।
जोखिम और सावधानी : हालाँकि, काम अभी पूरा नहीं हुआ है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक रास्ता पूरी तरह सुरक्षित न हो जाए, आम लोग इस तरफ जाने की कोशिश न करें। पहाड़ों पर हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा हमेशा बना रहता है।











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