पगडंडी पर चलने को विवश हैं ग्रामीण आवेदन पश्चात भी नहीं हुई सुनवाई

पगडंडी पर चलने को विवश हैं ग्रामीण आवेदन पश्चात भी नहीं हुई सुनवाई

ब्यूरो चीफ कोल्हान: रेहान अख़्तर

मझगाँव: केन्द्र व राज्य सरकार भले ही हर दिन ग्रामीण सड़क को मुख्य सड़क से जोड़ने की बात करती हो पर सरजमीं की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण है कुमारडुँगी प्रखंड के रालीबेड़ा गाँव के बाईसाई से सेरेंगसाई ग्रामीण सड़क। यह सड़क कुमारडुँगी प्रखंड मुख्यालय से पूर्व दिशा के लगभग पन्द्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित खंडकोरी पंचायत के रालीबेड़ा गांव से बाईसाई से सेरेंगसाई को जोड़ती है। किंतु सरकारी अफसरों एवं जनप्रतिनिधियों के उपेक्षात्मक रवैया के कारण दशकों बीत जाने के बाद भी ग्रामीण पगडंडी रास्ते में चलने को मजबूर हैं। जिसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं है।

हर दिन गांव के युवा एवं अधेड़ रोजी-रोटी की जुगाड़ में प्रखण्ड व पँचाायत जाते हैं। इन्हें आने-जाने के लिए यही पगडंडी रास्ता एकमात्र साधन है। यहां के ग्रामीणों को यूं तो सालों भर आवागमन के लिए दिक्कतें तो होती हैं खासकर बरसात के दिनों में कई कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यहां के कोई ग्रामीण यदि बीमार पड़ जाए तो उन्हें इलाज के लिए आने-जाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इनकी इस समस्या को लेकर कोई भी गंभीर नहीं हैं।

 

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