गांव से लेकर शहर तक विकास की तैयारी, आपदा प्रबंधन पर भी सरकार का विशेष जोर
केंद्रीय बजट 2026-27 मेघालय के लिए राहत और उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्य के लिए खजाना खोलते हुए 328 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि (Grant) मंजूर की है। यह धनराशि राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
गांवों और शहरों का कायाकल्प : सरकार ने इस बार सबसे ज्यादा ध्यान जमीनी स्तर के विकास पर दिया है। ग्रामीण इलाकों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए 190 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस पैसे का इस्तेमाल गांवों में पानी, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने में होगा। वहीं, शहरों को भी पीछे नहीं छोड़ा गया है। शहरी निकायों को 49 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि शहर की साफ-सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा जा सके।
मुसीबत से निपटने की तैयारी : मेघालय की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, बजट में आपदा प्रबंधन पर खासा जोर दिया गया है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तुरंत राहत पहुंचाने के लिए ‘राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष’ (SDRF) को 63 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा, आपदा के खतरों को कम करने और पूर्व तैयारी के लिए ‘राज्य आपदा शमन कोष’ (SDMF) के लिए 16.20 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं।
चुनौतियां और अवसर : हालांकि, सब कुछ एकदम गुलाबी नहीं है। जनसंख्या और आय के नए मानकों के कारण केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है। राज्य सरकार फिलहाल 16वें वित्त आयोग की इन सिफारिशों का विश्लेषण कर रही है ताकि इसका अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर समझा जा सके।
बड़ी तस्वीर : राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो केंद्र सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट्स (Capex) के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा है। साथ ही, राज्यों को विकास कार्यों के लिए बिना ब्याज के कर्ज देने हेतु 1.85 लाख करोड़ रुपये का फंड भी तैयार है। मेघालय सरकार के पास मौका है कि वह इन केंद्रीय योजनाओं का फायदा उठाकर राज्य की तरक्की को नई ऊंचाइयों पर ले जाए।
कुल मिलाकर, यह बजट मेघालय के लिए आगे बढ़ने का एक ठोस अवसर है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि आने वाले साल में यह पैसा धरातल पर कितना असर दिखाता है।











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