पर्यावरण राज्य

कुदरत की मार: टंगमर्ग और पट्टन में भारी ओलावृष्टि से फलों के बागान तबाह, खून-पसीने की कमाई मिट्टी में मिली

प्रभावित किसानों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और नुकसान के आकलन की मांग की।
प्रभावित किसानों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और नुकसान के आकलन की मांग की।

टंगमर्ग/पट्टन, 13 मई | नीलकंठ पान

उत्तरी कश्मीर के टंगमर्ग और पट्टन इलाकों में बुधवार को अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने बागवानी क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है। कुछ ही मिनटों तक चले इस कुदरती कहर ने फलों के बागानों, विशेषकर सेब की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, जिससे स्थानीय किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है।

सालों की मेहनत चंद मिनटों में खाक

गुलमर्ग विधानसभा क्षेत्र के कई गांव जैसे याल, कृशहामा, कटी बाग, लालपोरा, चाची लोरा, धोबीवान और जोकर इस ओलावृष्टि की चपेट में आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, ओले इतनी तीव्रता के साथ गिरे कि पेड़ों पर लगे फूल और छोटे फल पूरी तरह टूटकर जमीन पर बिछ गए। यह वह समय है जब सेब के पेड़ों पर कलियां और शुरुआती फल आने शुरू होते हैं, ऐसे में इस नुकसान की भरपाई करना लगभग नामुमकिन है।

किसानों की सरकार से गुहार

प्रभावित फल उत्पादकों का कहना है कि उनकी साल भर की मेहनत और कमाई का जरिया अब खत्म हो चुका है। बागवानों ने प्रशासन और केंद्र शासित प्रदेश सरकार से अपील की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत दौरा किया जाए और राजस्व विभाग के माध्यम से नुकसान का सटीक आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए।

अभी भी कई दूरदराज के इलाकों से बड़े पैमाने पर फसल बर्बादी की खबरें आ रही हैं, जिससे कृषि और बागवानी विभाग की चिंता बढ़ गई है।