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क्षेत्रीय न्यूज़

5 दिसंबर 1939 को मंगलवार के दिन जमशेदपुर से हाता होते हुए कलिकापुर पहुंचे थे सुभाष चंद्र बोस

अभिजीत सेन (संवादाता पोटका)

5 दिसंबर 1939 को मंगलवार के दिन सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता का दीप प्रज्वलित करने लोगों में स्वतंत्रता के प्रति एक जुनून जगाने के लिए पहुंचे थे जिस चेयर पर मेज पर बैठकर उन्होंने सभा को संबोधित किया था उस कुर्सी और मेज को आज पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा नेताजी के फोटो पर माल्यार्पण कर तथा पुष्प अर्पित कर कलिकापुर सुभाष चंद्र उच्च विद्यालय को हर हाल में विकसित करने का संकल्प लिया इसके साथ ही कालिकापुर गांव के डॉ विकास चंद्र भगत प्रत्येक वर्ष सुभाष चंद्र बोस के जन्म जयंती के अवसर पर उनके सभा स्थल के फोटो को रखकर पुष्प अर्पित करते हैं और उनके चिन्हों पर चलने का संकल्प लेते हैं।

आपको बता दें कि 1934 में स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर एवं अंग्रेजों के दमनकारी नीति के खिलाफ कुम्हार विद्रोह कलिकापुर में हुआ था जिसमें कलिकापुर स्थित थाना को स्थानीय ग्रामीणों ने दरोगा को बांधकर मारा था एवं थाने को आग के हवाले कर दिया था जिसके बाद 78 लोगों पर मामला अंग्रेज सरकार द्वारा दर्ज किया गया था इस घटना से जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस अवगत हुए 1939 में तब उन्होंने 5 दिसंबर को मंगलवार के दिन जमशेदपुर से हाता होते हुए कलिकापुर पहुंचे और एक सभा को संबोधित किया एवं लोगों में स्वतंत्रता के प्रति चिंगारी जलाने का काम किए आज पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा भी कलिकापुर पहुंचे एवं सुभाष चंद्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिए साथ ही साथ उन्होंने “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” को 10 भाषाओं में संकलित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किए उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि राजनीति हो चाहे समाज हो अब सुभाष चंद्र बोस की नीति में चलने का समय आ चुका है।

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आजाद ख़बर

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